नवग्रह आरती: शनि-राहु शांति, समस्त दोष निवारण और भाग्य !

नवग्रह आरती: वैदिक परंपरा, साहित्यिक उद्गम और अनुष्ठानिक पद्धति का विस्तृत शोध प्रतिवेदन
1. नवग्रह आरती का मूल पाठ (संपूर्ण)
आरती श्री नवग्रहों की कीजै
आरती श्री नवग्रहों की कीजै ।
बाध, कष्ट, रोग, हर लीजै ॥
सूर्य तेज़ व्यापे जीवन भर ।
जाकी कृपा कबहुत नहिं छीजै ॥
रूप चंद्र शीतलता लायें ।
शांति स्नेह सरस रस भीजै ॥
(आरती श्री नवग्रहों की कीजै...)
मंगल हरे अमंगल सारा ।
सौम्य सुधा रस अमृत पीजै ॥
बुध सदा वैभव यश लीये ।
सुख सम्पति लक्ष्मी पसीजै ॥
(आरती श्री नवग्रहों की कीजै...)
विद्या बुद्धि ज्ञान गुरु से ले लो ।
प्रगति सदा मानव पै रीझे ॥
शुक्र तर्क विज्ञान बढावै ।
देश धर्म सेवा यश लीजे ॥
(आरती श्री नवग्रहों की कीजै...)
न्यायधीश शनि अति प्यारे ।
जप तप श्रद्धा शनि को दीजै ॥
राहु मन का भरम हरावे ।
साथ न कबहु कुकर्म न दीजै ॥
(आरती श्री नवग्रहों की कीजै...)
स्वास्थ्य उत्तम केतु राखै ।
पराधीनता मनहित खीजै ॥
जो नवग्रह की आरती गावे ।
सब सुख भोग परम पद पावे ॥
(आरती श्री नवग्रहों की कीजै...)
बीज मंत्र एवं जप विधान
| ग्रह (Planet) | बीज मंत्र (Beej Mantra) | जप संख्या (अनुशंसित) |
|---|---|---|
| सूर्य | ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः | 7000 (40 दिन में) |
| चंद्र | ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः सोमाय नमः | 11,000 |
| मंगल | ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः | 10,000 |
| बुध | ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः | 9,000 |
| गुरु | ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः | 11,000 |
| शुक्र | ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः | 16,000 |
| शनि | ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः | 23,000 |
| राहु | ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः | 18,000 |
| केतु | ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः | 17,000 |
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